कई स्टोर इसलिए लड़खड़ाते हैं कि लॉन्च जल्दबाज़ी में हुआ और पहले ही ऑर्डरों में गड़बड़ निकल आई। एक ग़लत कीमत या न चलने वाला भुगतान बटन पहली छाप बिगाड़ देता है।
यह सूची लॉन्च से एक दिन पहले क्रम से चलाएँ और हर बिंदु खुद आज़माकर टिक करें।
ऑनलाइन स्टोर शुरू करने से पहले उत्पाद पेज, भुगतान, डिलीवरी, नीतियाँ और मोबाइल पर टेस्ट ऑर्डर ज़रूर जाँचें। इन्हीं से तय होता है कि पहला ग्राहक दोबारा आएगा या नहीं।
उत्पाद और सामग्री
हर उत्पाद की साफ़ फ़ोटो, रुपये में कीमत, साइज़ या रंग के विकल्प और उपलब्धता सही हो। विवरण ऐसा हो कि ग्राहक के आम सवालों के जवाब दे दे।
- हर फ़ोटो मोबाइल पर जल्दी खुले और धुंधली न हो।
- कीमत में शिपिंग शुल्क साफ़ लिखा हो।
- जो चीज़ स्टॉक में नहीं, उस पर “उपलब्ध नहीं” का निशान लगाएँ।
भुगतान और डिलीवरी
UPI, कार्ड, नेटबैंकिंग या COD, जो भी रखें, हर तरीके से एक असली टेस्ट ऑर्डर दें। देखें कि ऑर्डर की पुष्टि आप तक और ग्राहक तक पहुँचती है।
डिलीवरी के पिन कोड, अनुमानित दिन और शिपिंग शुल्क पेज पर लिखें। कूरियर दरें और शर्तें बदलती रहती हैं, इसलिए लॉन्च से पहले उनसे वर्तमान जानकारी ले लें।
नीतियाँ, GST और संपर्क
रिटर्न, एक्सचेंज और रद्द करने की नीति सरल भाषा में लिखें और फ़ूटर में लिंक दें। व्हाट्सऐप नंबर, ईमेल और पता साफ़ रखें, क्योंकि भारतीय ग्राहक सबसे पहले यही देखते हैं।
अगर आप GST के अंतर्गत पंजीकृत हैं, तो GSTIN और चालान की जानकारी नियमों के अनुसार रखें। गोपनीयता नीति में बताएँ कि ग्राहक का डेटा कैसे इस्तेमाल होता है। कानूनी बातों पर संदेह हो तो विशेषज्ञ से पूछ लें।
तकनीकी जाँच
साइट को अपने फ़ोन, किसी दोस्त के फ़ोन और कंप्यूटर पर खोलें। धीमे नेटवर्क पर भी आज़माएँ, क्योंकि कई ग्राहक मोबाइल डेटा पर होते हैं। हर लिंक, फ़ॉर्म और बटन दबाकर देखें।
अगर आपने Uttra से साइट बनवाई है तो चैट में लिखें: “चेकआउट पेज मोबाइल पर ठीक करो और ऑर्डर के बाद धन्यवाद पेज दिखाओ।” फिर प्रकाशित करने से पहले प्रीव्यू में खुद ऑर्डर देकर देखें।
लॉन्च के बाद पहला हफ़्ता
शुरुआती ऑर्डर खुद निगरानी में भेजें, ग्राहकों से राय लें और जो सवाल बार-बार आए उसे पेज पर जोड़ें। बड़ा विज्ञापन खर्च तब करें जब पूरी प्रक्रिया एक बार ठीक चल चुकी हो।