कन्वर्ज़न रेट का मतलब है कि साइट पर आने वालों में से कितने ऑर्डर देते हैं या संपर्क करते हैं। अगर ट्रैफ़िक लाने पर पैसा लग रहा है, तो पहले मौजूदा विज़िटर को ग्राहक बनाना ज़्यादा सस्ता पड़ता है।
छोटी साइट पर जटिल टेस्टिंग टूल की ज़रूरत नहीं। सरल बदलाव और धैर्य काफ़ी हैं।
कन्वर्ज़न रेट बढ़ाने के लिए एक बार में एक चीज़ बदलें: हेडलाइन, बटन, भरोसे के संकेत या चेकआउट। फिर दो हफ़्ते बाद नतीजा देखें।
हेडलाइन और पहला प्रभाव
विज़िटर कुछ सेकंड में तय करता है कि रुकना है या नहीं। हेडलाइन में साफ़ लिखें कि आप क्या बेचते हैं, किसके लिए, और उसे क्या फ़ायदा होगा।
आम वाक्यों की जगह ठोस बातें लिखें, जैसे शहर, डिलीवरी का समय या रिटर्न की नीति।
भरोसे के संकेत
ऑनलाइन ख़रीदारी में सबसे बड़ी रुकावट अक्सर भरोसा होती है। भुगतान के आसान और जाने-पहचाने तरीके इसे कम करते हैं, इसलिए उन्हें छिपाएँ नहीं।
- UPI, कार्ड और कैश ऑन डिलीवरी जैसे भुगतान तरीके एक जगह दिखाएँ; कार्ड और UPI के लिए Razorpay जैसा गेटवे जोड़ा जा सकता है।
- असली ग्राहकों की समीक्षाएँ, हो सके तो नाम और शहर के साथ।
- वापसी और बदलाव की नीति, संपर्क नंबर और असली पता।
- GST नंबर और बिल की सुविधा, ख़ासकर कंपनियों को बेचते समय।
बटन और चेकआउट आसान करें
हर पेज पर एक साफ़ बटन हो, जैसे अभी ऑर्डर करें या व्हाट्सऐप पर पूछें। फ़ॉर्म में सिर्फ़ वही फ़ील्ड रखें जो सच में चाहिए: नाम, फ़ोन, पता। रजिस्ट्रेशन अनिवार्य न करें।
Uttra में आप लिख सकते हैं: प्रोडक्ट पेज पर ऑर्डर बटन मोबाइल पर नीचे चिपका हुआ रखो और उसके नीचे लिखो कि UPI और कैश ऑन डिलीवरी उपलब्ध है। फिर प्रीव्यू में फ़ोन के साइज़ पर देख लें।
सही तरीके से टेस्ट करें
एक बदलाव करें, तारीख़ लिख लें, और कम से कम दो हफ़्ते चलने दें। पहले और बाद का कन्वर्ज़न रेट, और उसी दौरान ट्रैफ़िक का स्रोत, दोनों देखें।
अगर एक साथ पाँच चीज़ें बदल दीं तो पता नहीं चलेगा कि किससे फ़र्क़ पड़ा। जो बदलाव काम न करे उसे वापस कर दें और अगला आज़माएँ।
मोबाइल की रफ़्तार भी टेस्ट का हिस्सा है। भारी तस्वीरें धीमे नेटवर्क पर ऑर्डर छुड़वा देती हैं।