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मार्केटिंग और विज़िबिलिटी5 मिनट पढ़ें

नई वेबसाइट पर क्या मापें और एनालिटिक्स कैसे सेट करें?

नई साइट के लिए ज़रूरी आंकड़े, एनालिटिक्स और सर्च कंसोल की सेटिंग, और बिना उलझे लक्ष्य तय करने का आसान तरीका।

नई वेबसाइट बनने के बाद ज़्यादातर लोग बस विज़िटर की संख्या देखते रहते हैं। लेकिन अकेली संख्या कुछ नहीं बताती: सौ विज़िटर आएँ और कोई ऑर्डर न दे तो समस्या कहीं और है।

अच्छी बात यह है कि शुरुआत के लिए मुफ़्त टूल काफ़ी हैं। ज़रूरी यह है कि आप पहले तय कर लें कि आपके लिए सफलता का मतलब क्या है।

नई साइट पर पहले तीन चीज़ें मापें: लोग कहाँ से आए, कौन से पेज देखे, और कितनों ने ऑर्डर या संपर्क किया। बाक़ी डैशबोर्ड बाद में देखें।

पहले लक्ष्य तय करें

अपने बिज़नेस के हिसाब से एक या दो लक्ष्य लिखें। ऑनलाइन स्टोर के लिए ऑर्डर पूरा होना, सेवा के लिए व्हाट्सऐप बटन या फ़ोन पर क्लिक, और किसी संस्था के लिए फ़ॉर्म जमा होना।

लक्ष्य तय हो तो हर संख्या का मतलब साफ़ होता है, वरना ग्राफ़ सिर्फ़ सजावट बन जाते हैं।

दो मुफ़्त टूल लगाएँ

गूगल एनालिटिक्स बताता है कि विज़िटर साइट के अंदर क्या करते हैं, और सर्च कंसोल बताता है कि गूगल में किन शब्दों पर आपकी साइट दिखी। दोनों को साइट से जोड़ना एक बार का काम है।

Uttra में चैट पर लिखें: साइट में गूगल एनालिटिक्स का ट्रैकिंग कोड लगाओ और व्हाट्सऐप बटन के क्लिक को इवेंट के तौर पर दर्ज करो। फिर पब्लिश करें और अपने फ़ोन से साइट खोलकर रियल-टाइम रिपोर्ट में अपनी विज़िट देखें।

हर हफ़्ते सिर्फ़ ये आंकड़े देखें

शुरुआती महीनों में छोटी सूची काफ़ी है:

  • ट्रैफ़िक के स्रोत: गूगल, इंस्टाग्राम, फ़ेसबुक, व्हाट्सऐप या सीधे।
  • सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले पेज और वे पेज जहाँ लोग छोड़कर चले जाते हैं।
  • मोबाइल और कंप्यूटर का अनुपात, क्योंकि भारत में ज़्यादातर विज़िटर मोबाइल से आते हैं।
  • लक्ष्य पूरा करने वालों की संख्या।

आंकड़ों से फ़ैसला लें

अगर मोबाइल विज़िटर ज़्यादा हैं और कन्वर्ज़न कम, तो मोबाइल पर फ़ॉर्म, बटन और रफ़्तार जाँचें। अगर इंस्टाग्राम से लोग आते हैं पर पहले पेज से लौट जाते हैं, तो विज्ञापन और पेज का संदेश आपस में मेल नहीं खाते।

एक बार में एक बदलाव करें और दो हफ़्ते इंतज़ार करें, तभी पता चलेगा कि किस चीज़ से फ़र्क़ पड़ा। कोई नतीजा निकालने के लिए काफ़ी विज़िटर चाहिए, कुछ दिनों के उतार-चढ़ाव से घबराएँ नहीं।

अगर आप यूरोप या अन्य देशों के विज़िटर भी लेते हैं, तो कुकी सहमति की ज़रूरत अलग हो सकती है; पर पहले भारत के अपने ग्राहकों के लिए प्राइवेसी पेज साफ़ लिखें।

आम सवाल

एक मानक ट्रैकिंग कोड का असर बहुत कम होता है। धीमी साइट की आम वजह भारी तस्वीरें होती हैं, इसलिए तस्वीरें छोटी करके लगाएँ।

आम तौर पर कुछ दिन से एक-दो हफ़्ते लग सकते हैं। पहले दिन ख़ाली रिपोर्ट देखकर परेशान न हों।

वे सिर्फ़ पोस्ट की पहुँच बताते हैं। आपकी साइट पर लोगों ने क्या किया, यह सिर्फ़ साइट का अपना एनालिटिक्स बताता है।

अपने प्रोजेक्ट पर आज़माएँ

जो चाहते हैं अपने शब्दों में बताइए और अपनी साइट या सिस्टम को बनते देखिए — फिर बातचीत से बदल दीजिए।

मुफ़्त शुरू करें

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